घर में कैश रखने की सीमा तय कर सकती है सरकार

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कालेधन पर नकेल कसने के लिए मोदी सरकार एक और बड़ा फैसला ले सकती है। इसके तहत घर में कैश रखने और कैश लेनदेन की सीमा तय हो सकती है। लेनदेन में कैश के कम इस्तेमाल को लेकर वित्त मंत्रालय कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें सरकार घर में कैश रखने की सीमा तय कर सकती है। माना जा रहा है कि नोटबंदी के बाद लगातार भारी मात्रा में कैश बरामद होने के कारण सरकार ऐसा फैसला लेने की तैयारी कर रही है।

वित्त मंत्रालय के सामने प्रस्ताव

सूत्रों ने कहा कि कैश रखने की सीमा तय करने का विचार वित्त मंत्रालय के विचाराधीन है। विगत में इस संबंध में कई सुझाव आए हैं लेकिन 8 नवंबर को 500 रुपए और 1,000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाने के बाद जिस तरह भारी मात्रा में नकदी पकड़ी जा रही है, उसे देखते नकदी रखने की सीमा तय करने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

…तो इसलिए जरूरी है नकदी की सीमा तय करना

उल्लेखनीय है कि एसआइटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम बी शाह और उपाध्यक्ष व उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्ति न्यायाधीश अरिजीत पसायत ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को संयुक्त पत्र लिखकर कहा है कि अगर नकदी रखने की सीमा तय नहीं की गई तो नोट पाबंदी का सरकार के फैसले का कोई असर नहीं होगा। कुछ दिनों के बाद फिर से लोग काला धन जमा करने लगेंगे।

15 लाख हो सकती है सीमा

एसआइटी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने अपने पत्र में हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया है कि नकदी रखने की अधिकतम सीमा कितनी हो लेकिन माना जा रहा है कि यह सीमा 15 लाख रुपये तय की जा सकती है। असल में एसआइटी ने जुलाई में वित्त मंत्रालय को सौंपी अपनी पांचवी रिपोर्ट में 15 लाख रुपये से अधिक कैश रखने के लिए आयकर आयुक्त की अनुमति लेनी की सिफारिश की थी। एसआइटी ने अपनी पांचवी रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की थी कि अगर कोई व्यक्ति अपने खाते से तीन लाख रुपये से अधिक निकालता है तो बैंक को इसे संदेहास्पद मानकर फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट और आयकर विभाग को सूचित करना चाहिए।